शब्द है मिश्री से भी मीठा,
शब्द रिश्तों को आपस में है समेटा।
शब्द का संवाद,
उत्पन्न करता बड़ा विवाद॥
शब्द भी ऐसे तीखे,
मिरचे भी पड़ जाए फीके।
शब्द अंगार लगाता,
आपस में खूब लड़वाता।
शब्द का संवाद,
सब कर देता बर्बाद॥
शब्द है नीम से भी कड़वी चीज,
भुला देती है सारी तमीज़।
शब्द है बड़ा करामाती,
शब्द है खूब शरारती।
शब्द का संवाद,
करवाता है जघन्य अपराध॥
शब्द ऐसे कड़कते कि बिजली भी घबराए,
शब्द ऐसे कठोर कि पत्थर भी शरमाए।
शब्द मे है ऐसी धार,
जो हासिल न कर पाए तलवार।
शब्द कर देता ऐसा वार,
जिससे बिखर जाते हैं परिवार।
शब्द का ही संवाद,
जिससे बना जातिवाद॥
शब्द के बल से सभी थर्राए,
शब्द ही है जो कहर बरपाए ।
शब्द पैदा करता है लोगों मे फूट,
शब्द ही फैलाता सत्य व झूठ।
स्थापित करे ऐसे शब्द का संवाद,
जिससे विकसित हो स्वस्थ्य समाजवाद॥
शब्द हमें यह संदेश है देता,
उपयुक्त शब्द के उपयोग से बनो विजेता।
वैसे तो शब्द का संवाद,
अभिव्यक्ति के नाम से है आजाद॥
शिवम् सेवानाथ तिवारी "सुरज"
1 टिप्पणी:
Yes absolutely right 👌😊
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