शुरू हुआ मानव जीवन तब से शुरू मेरी कहानी।
मानव हुआ जब धरती पर उत्पन्न,
लगी भूख जब खोजा उसने भोजन व अन्न।
परंतु वर्षा, शरद व ग्रीष्म की जलवायु,
महसूस कर रही थी मानव की स्नायु।
ऋतुओं से सुरक्षा हेतु मानव ने जब ठानी,
तब से शुरू मेरी कहानी ॥
प्रथम रूप में मेरे मानव ने किया उपयोग पत्ता व खाल,
इस रूप में मै बना मानव तन की रक्षा का ढाल।
लंबा वक्त गुजारा इस रूप में मैने,
किंतु कुछ हटकर सोचा तब मानव ने।
कालांतर उसने खोजी कपास की घानी,
तब शुरू हुईं मेरे नए रूप कि कहानी ॥
विकास की आँधी चली जब जोरो में,
कपास का रूप बदल गया तब डोरो में।
मानव ने डोरो को आपस मे बुना,
और जग ने मेरा एक नया रूप चुना।
किया सदुपयोग मेरा तब समझा मानव है ज्ञानी,
फिर क्या! नए युग में पहुंची मेरी कहानी ॥
बदला युग और बदली मेरी काया,
कपास के अलावा रेशम, मखमल मानव मन भाया।
समय समय में उसने खोजे पदार्थ बहुत सारे,
जिनका उपयोग कर मुझे दिए रूप बहुत ही न्यारे।
इसके बाद क्या दुनिया हुई मेरी दिवानी,
यूँ आगे बढ़ी मेरे विकास की कहानी ॥
मानव ने उस दौर में मेरा किया अधिक उत्पाद,
मेरी विक्री कर मानव को लग गया धन का स्वाद।
मेरी ऊँची दर से करने लगा व्यापार,
व्यापारी के लिए था मैं मोती का हार।
नया रूप पाकर उफान पर थी मेरी जवानी,
चरम पर पहुंची मेरे जीवन की कहानी ॥
मेरे जीवन के इस सफर के काल में,
मानव फसता गया असमानता के जाल मे।
पहनावे को देख वह समझा खुद में अन्तर,
जिससे मानव समाज में संघर्ष होते रहे निरंतर।
उस वक्त मै समझा मानव है कितना अभिमानी,
त्यों शुरू हुई मेरे जीवन के संघर्ष की कहानी ॥
आज समाज विकसित हो रहा तीव गति पर,
मेरी जिंदगी टिकी है मानव की सहमति पर।
किसी ने मेरे आकार को कर दिया है बेहद छोटा,
तो कइयों ने मेरे रूप को कर दिया है खोटा।
फैशन की दुनिया ने की मेरे साथ बड़ी शैतानी,
अब उतार पर हैं मेरी कहानी ॥
ऐसी स्थिति में पड़ा हूँ मैं आज,
जहाँ मानव में बची नहीं है लाज।
मेरे जीवन की स्थिति बेहद जर्जर,
मेरा भविष्य आप लोगो पर निर्भर।
बहुत खुशी हुई मुझे जो आप सुने मेरी जुबानी,
संक्षेप में मेरी यही है कहानी ॥

शिवम् सेवानाथ तिवारी
3 टिप्पणियां:
Bahut Sundar likha hai aapne ..
Great and wonderful work... 😇🤗🙏🏻
Awesome 👌👍
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